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शनिवार, 29 जनवरी 2011

पहली समस्या पूर्ति - चौपाई - मयंक अवस्थी जी [६] और रवि कांत पाण्डेजी [७]

सम्माननीय साहित्य रसिको

पहली समस्या पूर्ति 'चौपाई' के अगले पड़ाव में इस बार दो रचनाधर्मियों को पढ़ते हैं|


भाई श्री मयंक अवस्थी जी:-

श्री मयंक अवस्थी जी रिजर्व बॅंक, नागपुर में कार्यरत हैं| शे'रो शायरी का बहुत ही जबरदस्त ज्ञान है आपको| और अब देखिए उन की अनुभवी लेखनी ने चौपाइयों के माध्यम से क्या जलवे बिखेरे हैं:-

निर्निमेष तुमको निहारती|
विरह –निशा तुमको पुकारती|
मेरी प्रणय –कथा है कोरी|
तुम चन्दा, मैं एक चकोरी|१|

खत भी तुमको भिजवाया पर|
शलभ, वर्तिका तक आया पर|
कब सुनते हो शून्य कथायें|
महाअशन में ये समिधायें|२|

तुम बादल मैं प्यासी धरती|
तुम बिन मैं सिँगार क्या करती|
बन जाते माथे पर कुमकुम|
कितने अच्छे लगते हो तुम|३|
शलभ=पतंगा, वर्तिका=शम्मा, महाअशन=यज्ञ की विकराल अग्नि



भाई श्री रविकान्त पाण्डे जी:-

भाई रवि कांत पाण्डे जी हम से पहली बार जुड़े हैं| उन के बारे में मुझे विशेष जानकारी नहीं है, परंतु उनकी लेखनी स्वयँ ही उनका परिचय दे रही है:-

मौसम के हाथों दुत्कारे|पतझड़ के कष्टों के मारे|सुमन हृदय के जब मुरझाये|
तुम वसंत बनकर प्रिय आये|१|


नूतन किसलय तुमसे पाकर|
जीर्ण-शीर्ण सब पात हटाकर|

मस्ती में होकर मतवाली|

झूम रही उपवन की डाली|२|


लोग कहें घर दूर तुम्हारा|

किंतु नहीं मैने स्वीकारा|

दिल में मेरे बसते हो तुम|

कितने अच्छे लगते हो तुम|३|


भाई श्री मयंक जी और भाई श्री रवि कांत जी को बहुत बहुत बधाई इतने सुंदर्र और स-रस चौपाइयों को पढ़ने का सु-अवसर प्रदान करने के लिए|

इस आयोजन को गति प्रदान करने हेतु सभी साहित्य सेवियों से सविनय निवेदन है कि अपना अपना यथोचित योगदान अवश्य प्रदान करें| अपनी रचनाएँ navincchaturvedi@gmail.com पर भेजने की कृपा करें|

पहले समस्या पूर्ति के बार में और अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें:- समस्या पूर्ति: पहली समस्या पूर्ति - चौपाई

5 टिप्‍पणियां:

  1. मयंक जी और रविकांत जी दोनों की चौपाइयां प्रभावशाली और संगीतमय हैं... सुन्दर ! बधाई कवि द्वय और संयोजक नवीन जी को !

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  2. बहुत सुंदर चौपाइयाँ हैं मयंक जी एवं रविकांत जी की। बधाई

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  3. बहुत सुन्दर नवीन जी सबसे पहले आप को बहुत बहुत धन्यवाद की आप ने सभी प्रतिभासंपन्न साहित्यकारों को एकत्र करने का जो सफल प्रयास किया है |
    और मयंक जी रविकांत जी आप को बहुत बहुत धन्यवाद की आप ने इतनी सुन्दर अभियक्ति से हम सभी को मंत्र मुग्ध किया |

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  4. बधाई इस खूबसूरत आयोजन के लिये, विशेषकर इसलिये कि हिन्‍दी छन्‍द पर तरही का विचार पहली बार जानकारी में आया है।
    दोनों प्रस्‍तुतियॉं भी खूबसूरत हैं।

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  5. आपका यह आयोजन काफ़ी सफल हो रहा है। दोनों कवियोम की चौपाइयां बहुत अच्छी हैं।

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